गोण्डा विधायक सदर के प्रयासों से प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर शहीदों की स्मृ ति में15 अगस्त को क्रान्ति उपवन में 35 फीट ऊंचा स्थापित किया जाएगा क्रान्ति स्तम्भ | ( निशिथ कुमार की खास रिपोर्ट गोंडा )


( गोण्डा विधायक सदर के प्रयासों से प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर शहीदों की स्मृ ति में15 अगस्त को क्रान्ति उपवन में 35 फीट ऊंचा स्थापित किया जाएगा क्रान्ति स्तम्भ )
गोण्डा विधायक सदर श्री प्रतीक भूषण सिंह के प्रयासों से प्रथम स्वाधीनता संग्राम के प्रथम पंक्ति के महानायक महाराजा देवीबख्श सिंह सहित जिले के 26 रणबांकुरों की स्मृति में जिले को जल्द ही एक बड़ी पहचान मिलने जा रही है। आगामी 75वें स्वाधीनता दिवस 15 पन्द्रह अगस्त के दिन नगर के मण्डे नाला पर क्रान्ति उपवन की आधार शिला रखी जाएगी। मण्डे नाला पर सड़क के बीच खाली भूमि पर 35 फुट ऊंचे भव्य क्रान्ति स्तम्भ एवं क्रान्ति उपवन पार्क की स्थापना प्रारम्भ होगी जिसे आगामी सितम्बर माह के अन्त तक पूर्ण कराकर लोकार्पित कर दिया जाएगा। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए विधायक सदर श्री सिंह ने बताया कि गोण्डा नगर में बनने वाला क्रांति उपवन पार्क इतिहास प्रेम व प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर शहीदों के प्रति आदर व सम्मान की अभिव्यक्ति हैं। भावी पीढ़ी में स्वतंत्रता कालीन आचरण विकसित करने एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान को निरन्तर बनाये रखने के उद्देश्य से स्थानीय विकास निधि से क्रान्ति उपवन पार्क का निर्माण कार्य शीघ्र ही शुरू होगा। उन्होंने कहा कि क्रान्ति उपवन स्वदेश की इंच-इंच भूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले हजारों हिन्दू-मुसलमान पुरखों को स्मृति स्वरूप समर्पित है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1957 में भारत सरकार द्वारा प्रथम स्वाधीनता संग्राम का शताब्दी वर्ष मनाया गया, जिसके क्रम में आयोजन समिति द्वारा प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अग्रिम पंक्ति के 8 प्रमुख क्रांतिकारियों की एक चित्रमाला जारी की गयी तथा उसी चित्र माला को आयोजन का मुखपृष्ठ मानते हुए देश भर में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। शताब्दी समारोह आयोजन समिति द्वारा चित्रमाला में क्रमवार बिदोह की प्रथम घटना मंगल पाण्डेय से लेकर विद्रोह की अन्तिम लड़ाई देवीबख्श सिंह तक की श्रृंखला को दर्शाया गया है। आयोजन समिति द्वारा 1957 में जारी की गयी चित्रमाला को पुनः दोहराते हुए पार्क में क्रांति स्तम्भ पर आठ अमर सेनानियों को सचित्र दर्शाया गया है। क्रांति स्तम्भ के ऊपर प्रथम स्वाधीनता संग्राम का प्रतीकात्मक चिन्ह मसाल है जो कि भावी पीढ़ी को राष्ट्रहित के लिए निरन्तर एकजुट होने की प्रेरणा देती रहेगी। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि शताब्दी वर्ष की आयोजन समिति के द्वारा देश भर के जिन 08 प्रमुख क्रांतिकारियों की चित्रमाला जारी की गयी उसमें गोण्डा नरेश अमर सेनानी राजा देवीबख्श सिंह को स्थान दिया गया। बहादुरशाह जफर, मंगल पाण्डेय, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, कुंवर सिंह, नाना साहब व बेगम हजरत महल जैसे अग्रिम पंक्ति के क्रांतिकारी नेताओं के साथ राजा गोण्डा को शामिल किया जाना इस क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष के लिए राजा देवीबख्श सिंह के आह्वान पर गोण्डा जनपद के गांव-गांव से अपने प्राणों की आहुति देने के लिए लोग क्रांति में शामिल हुए। वर्ष 1856 के प्रारम्भिक माह में ही देश भर में अंग्रेजी हुकूमत के काबिज होने के बावजूद राजा देवीवख्श सिंह के नेतृत्व में जनवरी 1859 तक क्रांति का विगुल फूंका गया। इस लम्बी समयावधि में राजा गोण्डा को सहयोग करने वाले घाघरा पार (देवीपाटन मण्डल) के 22 छोटे बड़े तालुकेदारों ने कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजी साम्राज्य के विरूद्ध विद्रोह किया। परिणामस्वरूप समूचे देश में प्रथम स्वाधीनता संग्राम की अंतिम कर्मभूमि होने का गौरव घाघरा पार की इस पवित्र भूमि को तथा नेतृत्व करने का गौरव गोण्डा नरेश देवीवख्श सिंह को प्राप्त हुआ है।
( इन क्रािन्तकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में महाराजा देवीबख्श सिंह का दिया था साथ, लगेगी पट्टिका )
1857 की प्रथम स्वाधीनता संग्राम में गोण्डा नरेश महाराजा देवीबख्श सिंह के नेतृत्व मेें अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत करने वाले शहीद क्रािन्तकारियों में भुवन सिंह राजा गोण्डा के सेनापति, महात्मा वनादास अशोकपुर, फजत अली मिर्जापुरवा मोतीगंज, गुलाब सिंह पूरे गुलाब वीरपुर विसेन, भगवत सिंह मझगवां, शिवा सिंह अनभुला, कैप्टन गजाधर पाण्डेय कप्तानपुरवा सरैया, रामदयाल मिश्रा कप्तान पुरवा सरैया, सैयद वंदे अली मेवातियान गोण्डा, सै0 आरिफ अली मेवातियान गोण्डा, काले खां धनौली, हुसैन खां धनौली, मशीयत खां धनौली, जालिम सिंह विशम्भरपुर, द्वंदा सिंह विशम्भरपुर, जगत सिंह विशम्भरपुर, भारत सिंह विशम्भरपुर, पृथ्पीपति सिंह मनकापुर, विश्राम सिंह विशुनपुर वैरिया, पृथ्वीपाल सिंह मेहनौन, अजब सिंह सकरौरा, अवधूत सिंह गोण्डा तथा बेनी सिंह मुजेहना शामिल रहे। इन सभी क्रान्तिकारियों का नाम शिलापट पर पार्क में प्रदर्शित किया जा रहा है |
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( निशिथ कुमार की खास रिपोर्ट गोंडा )
