आगरा बाह मार्ग पर चलने वाली सरकारी परिचालक लगा रहे हैं उत्तर प्रदेश रोडवेज को हजारों रुपये का चूना सवारियों से टिकट के पैसे लेकर थमा रहे फर्जी टिकट | ( बिघाराम वर्मा की खास रिपोर्ट )

 

( आगरा बाह मार्ग पर चलने वाली सरकारी परिचालक लगा रहे हैं उत्तर प्रदेश रोडवेज को हजारों रुपये का चूना सवारियों से टिकट के पैसे लेकर थमा रहे फर्जी टिकट )

उत्तर प्रदेशआगरा बाह परिचालक लगा रहे हैं उत्तर प्रदेश रोडवेज को हजारों रुपये का चूना सवारियों से टिकट के पैसे लेकर थमा रहे हैं फर्जी टिकट विरोध करने पर सवारियों से करते हैं अभद्र व्यवहारआगरा बिजली घर बस अड्डे से सरकारी बस में यात्रा करने वाली विकलांग महिला से विकलांग पास होने के बाद भी परिचालक ने लिया किराया | किराया लेने के बाद विकलांग महिला को थमाई फर्जी टिकटआगरा बाह मार्ग पर चलने वाली सरकारी बसों में चलता है फर्जी टिकट का खेल |सरकारी बसों में यात्रियों को कराई जा रही है फर्जी टिकटों पर यात्रा बाह सरकारी बसों के चुनाव में चले जाने का फायदा डग्गामार बस संचालक ही नहीं वरन रोडवेज के कर्मचारी भी उठा रहे हैं रोडवेज के परिचालक किराया वसूलने के बाद भी सवारियों को टिकट नहीं देते या फिर फर्जी टिकट थमा देते हैं जिससे परिवहन विभाग को हर माह लाखों रुपए का घाटा होता है।बता दें कि अभी विधानसभा चुनाव में सरकारी बसों के लगे होने के चलते मार्गों पर सरकारी बसों का टोटा है जिसका फायदा आगरा बाह मार्ग पर संचालित डग्गेमार वाहनों सहित सरकारी बसों के परिचालक भी फायदा उठा रहे हैं परिचालक अशिक्षित ग्रामीण सवारियों से किराए के पैसे लेकर उन्हें टिकट नहीं देते यदि कोई टिकट की जिद करे तो उसे फर्जी टिकट थमा कर बैठा देते हैं। ऐसा ही मामला आगरा बाह मार्ग पर बुधवार शाम देखने को मिला। रुपपुरा गाँव निवासी विकलांग महिला सीता देवी पत्नी कृपाल सिंह के मुताबिक वह बुधवार सुबह अपने विकलांग पास को रिनुअल कराने के लिए आगरा गयी थी।शाम को लौटते समय वह आगरा फोर्ट से बाह के लिए फाउंड्री नगर डिपो की अनुबंधित बस संख्या UP80 DT 7984 में बाह के लिए बैठी तो परिचालक ने उससे टिकट लेने को कहा जिस पर उसने परिचालक को विकलांग पास दिखाया। बता दें कि विकलांगों के लिए सरकार द्वारा सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा है लेकिन बस के परिचालक ने महिला को अनुबंधित बस का हवाला देते हुए विकलांग पास पर निशुल्क यात्रा न कराने की कहते हुए जबरन टिकट के पैसे ले लिए। महिला ने परिचालक को सौ का नोट दिया जिस पर परिचालक ने उसे आगरा से बाह तक के किराए के 83 रुपये काटकर 17 वापस कर दिए लेकिन उसे गंतव्य तक का टिकट नहीं दिया। जब महिला ने बार-बार उससे टिकट के लिए जिद की तो उसने महिला को गाड़ी में पड़ी पुरानी टिकट जिस पर 55 रुपये व आगरा से अरनोटा अंकित था दे दिया।जब महिला ने उससे कहा कि यह पुराना टिकट है और 55 रुपये का है जबकि उसने 83 रुपये दिए हैं तो बस के चालक और परिचालक उससे अभद्र व्यवहार करते हुए चुपचाप बैठ कर चलने की बात कही। चुप न बैठने पर रास्ते में उतारने की धमकी भी दी। महिला ने उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही तो परिचालक भड़क गया और उसने कहा कि चाहे जहां जिस अधिकारी से शिकायत कर लो कुछ नहीं कर पाओगी। बाह पहुंचने के बाद महिला ने बस स्टैंड पर हंगामा करना शुरू कर दिया जिस पर लोग एकत्रित हो गए इतने में अनुबंधित बस के चालक परिचालक बस अड्डे से बस को लेकर वापस चले गए।महिला ने उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है। बड़ा सवाल यह है कि आगरा बाह मार्ग पर चलने वाली इन अनुबंधित बसों के परिचालक आखिर किसकी सह पर सवारियों को बिना टिकट यात्रा करा कर रोडवेज को हर माह लाखों रुपए का चूना लगा रहे हैं।

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