उत्तर प्रदेश फिरोजाबाद उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ द्वारा केमिस्ट व निजी क्लीनिक में डीटीसी द्वारा टीबी मुक्त चलाये गये अभियान में कलेंडर के माध्यम से लोगों को किया गया जागरूक। ( योगेश कुमार पाठक की खास रिपोर्ट )|


( फिरोजाबाद उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ द्वारा केमिस्ट व निजी क्लीनिक में डीटीसी द्वारा टीबी मुक्त चलाये गये अभियान में कलेंडर के माध्यम से लोगों को किया गया जागरूक )
उत्तर प्रदेश फिरोजाबाद क्षय रोग यानि टीबी को जागरुकता के जरिए ही खत्म किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले मरीजों की पहचान कर उनका उपचार जरूरी है। तभी टीबी का खात्मा संभव है। डीटीसी द्वारा टीबी मुक्त फिरोजाबाद अभियान चलाया जा रहा है। इसमें डीटीसी द्वारा केमिस्ट व निजी क्लीनिकों पर आने वाले मरीजों को आईसी मैटेरियल के जरिए टीबी रोग के प्रति जागरुक किया जा रहा है। उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि क्षय रोग विभाग द्वारा जनपद के निजी क्लीनिकों और केमिस्ट का टीबी मुक्त फिरोजाबाद अभियान में सहयोग लिया जा रहा है। यहां पर आने वाले मरीजों को आईसी मैटेरियल के जरिए टीबी के प्रति जागरुक किया जा रहा है। इसके लिए विभाग द्वारा जनपद के निजी क्लीनिकों और केमिस्ट की दुकानों पर टीबी से जागरुकता के लिए पोस्टर लगाए जा रहे हैं। जिससे कि यहां पर आने वाले मरीज व उनके परिजन टीबी के प्रति जागरुक हों। डॉ. अशोक ने बताया कि जनवरी 2021 से दिसंबर 2021 तक जनपद में 5012 टीबी मरीज खोजे गए, इसमें से 3500 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। शेष मरीज उपचारित हैं। एक जनवरी 2022 से 23 फरवरी 2022 तक जनपद में 705 टीबी मरीज खोजे जा चुके हैं और सभी का उपचार शुरु कर दिया गया है। जिला पीपीएम समन्वयक मनीष यादव ने बताया कि टीबी मुक्त फिरोजाबाद अभियान में केमिस्ट टू केमिस्ट आईसी कैंपेन चलाया जा रहा है। इसके तहत केमिस्ट व डॉक्टरों को कैलेंडर, डायरी दिए जा रहे हैं । इसमें डीटीसी टीबीएचबी प्रमोद कुमार प्रबेंद्र कुमार सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा। जिला पीपीएम समन्वयक मनीष यादव ने बताया कि विभाग द्वारा ऐसे आशा कार्यकर्ता व स्वयंसेवी को 500 रुपए की धनराशि दी जाती है जो टीबी के मरीजों का चिन्हांकन कराते हैं या उन्हें डीटीसी लाकर उनकी जांच के बाद उनका उपचार शुरू करवाते हैं।
ये हैं टीबी के लक्षण
-टीबी का एक प्रमुख लक्षण है खांसी। अगर आपको तीन हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी हो तो इसे नजरअंदाज न करें।
-खांसी में खून आना
-सीने में दर्द या सांस लेने और खांसने में दर्द होना
-लगातार वजन कम होना
-चक्कर आना
-रात में पसीना आना
-ठंड लगना
-भूख न लगना
ऐसे करें बचाव
-टीबी की रोकथाम के लिए बच्चों को बीसीजी का टीका लगवाएं। इसके लिए अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
-टीबी के मरीज के संपर्क में आने से बचें। उनका बेड, तौलिया आदि शेयर न करें और एक ही कमरे में न सोएं।
-मास्क का इस्तेमाल करें।

( मंडल ब्यूरो चीफ योगेश कुमार पाठक )
