उत्तर प्रदेश औरेया फफूंद दिबियापुर मार्ग पर चल रही श्रीमद भागगत कथा के अंतिम दिन श्रोताओं की खूब उमड़ी भीड़। ( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट )


( औरेया फफूंद दिबियापुर मार्ग पर चल रही श्रीमद भागगत कथा के अंतिम दिन श्रोताओं की खूब उमड़ी भीड़ )
उत्तर प्रदेश औरेया फफूंद फफूंद दिबियापुर मार्ग पर स्थित ब्लाक भाग्यनगर के पास चल रही श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन भागवताचार्य पं. सुदीप कृष्ण देव ने कहा कि कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने राजमहल के द्वार पर पहुंच गए। यह सब देख वहां लोग यह समझ ही नहीं पाए कि आखिर सुदामा में ऐसा क्या है जो भगवान दौड़े दौड़े चले आए। बचपन के मित्र को गले लगाकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें राजमहल के अंदर ले गए और अपने सिंहासन पर बैठाकर स्वयं अपने हाथों से उनके पांव पखारे। कहा कि सुदामा से भगवान ने मित्रता का धर्म निभाया और दुनिया के सामने यह संदेश दिया कि जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। राजा हो या रंक मित्रता में सभी समान हैं और इसमें कोई भेदभाव नहीं होता। कथावाचक ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण सरल शब्दों में वर्णन किया कि उपस्थित लोग भाव विभोर हो गए।

( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट )
