आगरा से लगे बाडर राजस्थान रिछोहा के लगभग 2100 एकड़ के घनेरे जंगल में खुखांर जानवरों की सुगबुगाहट ने उड़ाई ग्रामीणों की नींद आठ दिन से लगे वन विभाग की टीम की पैनी नजर में ग्रामीणों ने ली राहत की सांस। ( योगेश पाठक की खास रिपोर्ट )


( आगरा से लगे बाडर राजस्थान रिछोहा के लगभग 2100 एकड़ के घनेरे जंगल में खुखांर जानवरों की सुगबुगाहट ने उड़ाई ग्रामीणों की नींद आठ दिन से लगे वन विभाग की टीम की पैनी नजर में ग्रामीणों ने ली राहत की सांस )
राजस्थान सीमा से लगे गांव रिछोहा के पास करीब तीन, चार सौ एकड़ का अरावली पर्वतमाला से लगा जंगल है, जिसमें ग्रामीणों के अनुसार सर्दियों से ही जंगली खूंखार जानवर की सुगबुगाहट दिख रही थी लेकिन बीते आठ दिनों से जानवर आबादी क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्शा रहा हैं जिससे ग्रामीण भय के साए में जी रहे हैं। हालांकि अभी तक जानवर ने किसी भी इंसान पर हमला करने की कोई खबर नहीं हैं। जंगली जानवरों से निजात दिलाने और उन्हें सकुशल पकड़ने के लिए वन विभाग और वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम ने डेरा डाल दिया हैं। दोनों ही टीमें लगातार हर गतिविधि में अपनी पैनी नजर जमाए हुए हैं। वाइल्ड लाइफ एसओएस के श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि टीम कल रिछोहा पहुंची थी और वन विभाग की टीम के सदस्यों के साथ देर रात्रि तक जानवरों को आइडेंटिफाई करने का काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। हालांकि उन्होंने एक पिंजरे में कुछ मांस के टुकड़े रखकर खुला छोड़ दिया था जिसमें से वह सुबह गायब मिले हैं। वन क्षेत्राधिकारी खेरागढ़ ने बताया हैं कि ग्रामीणों के सहयोग से टीम डेरा जमाए हुए हैं, जल्द ही जानवरों को काबू में करके पकड़ लिया जाएगा या फिर जल्द ही राजस्थान के जंगलों में वापिस लौट सकते हैं। रिछोहा का जंगल करीब तीन चार सौ एकड़, गुगाबंद का करीब 2100 एकड़ और बाघौर का करीब 1400 एकड़ का जंगल हैं। साथ ही तीनों जंगल राजस्थान की अरावली पर्वतमाला के काफी बड़े जंगलों से जुड़े हैं। वन विभाग और वाइल्ड लाइफ एसओएस का मानना हैं कि हो सकता हैं कि गर्मी में पानी की कमी के कारण जानवरों ने जगनेर की तरफ दस्तक दी |

( योगेश पाठक आगराकी खास रिपोर्ट )
