उत्तर प्रदेश औरैया में धान की फसल से फैल रही कुछ बिमारियों व किटाड़ुओ से बचाव हेतु पौधे सरंक्षण विशेषज्ञ द्वारा किसानों को दी गई जानकारी। ( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट )

( औरैया में धान की फसल से फैल रही कुछ बिमारियों व किटाड़ुओ से बचाव हेतु पौधे सरंक्षण विशेषज्ञ द्वारा किसानों को दी गई जानकारी )

उत्तर प्रदेश औरैया में धान की फसल से फैल रही कुछ बिमारियों व किटाड़ुओ से बचाव हेतु  धान की फसल में कंडुआ एक प्रमुख बीमारी है। इस बीमारी का प्रकोप जनपद में हो चुका है। इसकी रोकथाम हेतु कृषि विज्ञान केंद्र के पौध संरक्षण विशेषज्ञ श्री अंकुर झा ने बताया कि किसान भाई अपनी धान की फसल में इस बीमारी की रोकथाम हेतु निम्नलिखित उपाय करें जिससे धान की फसल को प्रभावित होने से बचाया जा सके। धान की फसल में बाली निकलते समय जब वातावरण में अधिक आर्द्रता होने के साथ ही बादल भी छाए रहते हैं, तब फसल में कंडुआ रोग (स्मट रोग) का बीजाणु धान की बाली के दानों को प्रभावित करता है। इससे प्रभावित दानों पर शुरुआत के समय हल्के सफेद से पीले रंग का पाउडर दिखाई देने लगता है बाद में वह भुरे से काले रंग का हो जाता है और धान की बालियां खराब हो जाती है और अत्यधिक प्रकोप होने पर फसल नष्ट हो जाती हैं।
धान की बाली में यह रोग लगने पर उसके दाने न सिर्फ खराब हो जाते हैं बल्कि वजन भी कम हो जाता है। इस रोग से अधिक प्रभावित पौधों की बालियों को सावधानी पूर्वक खेत से उखाड़कर खेत से दूर नष्ट कर देना चाहिए। यह रोग फसल में लगने के बाद फफूंदी नाशक का छिड़काव भी काम नहीं करता। इसलिए फसल में इसके लक्षण दिखाई देते ही रोग का उपचार करना चाहिए।
बीज शोधन विधि द्वारा कंडुआ रोग की रोकथाम कर सकते हैं। इसके लिए फफूँदीनाशक कार्बेन्डाजिम दवा को 2 ग्राम प्रति किग्रा. बीज का शोधन कर बोयें। इस रोग के बीजाणु मृदा में ही रहते हैं। तथा मृदा शोधन हेतु गर्मी में गहरी जुताई करें एवं खेत को ट्राइकोडर्मा धूल से या ट्राइकोडर्मा कल्चर से शोधित कर धान की रोपाई करें। फसल की प्रारम्भिक अवस्था में यूरिया का प्रयोग संतुलित मात्रा में करना चाहिए। रोग पर नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर खेत में 30 प्रतिशत बालियां आने से पहले छिड़काव करना फायदेमंद रहता है अथवा क्लोरथनोनिल 75 प्रतिशत डब्लू पी की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रभावित फसल पर छिड़काव करना चाहिए अथवा इसके अलावा कैप्टॉन नामक दवा का भी प्रयोग कर इसको फैलने से बचाया जा सकता है।

1. धान की फसल में शूट बोरर अथवा पीले रंग की सूड़ी अथवा पत्ती लपेटक सूड़ी की रोकथाम हेतु निम्न कीटनाशकों का शायंकाल के समय खेतों का पानी निलाकर छिड़काव करें। क्लोरेंट्रानिलिप्रोले 0.4% जी.आर. नामक दवा को 4 -5 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से सायंकाल के समय छिड़काव करें।

2. धान में भूरे फुदके से बचाव के लिए खेत का पानी तत्काल निकाल दें। फिप्रोनिल 0.3 जी. 8 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से सायंकाल के समय प्रयोग करें।
3. धान की फसल में तना गलन रोग की रोकथाम हेतु तत्काल खेतो का पानी निकाल दें और सांयकाल में टूबेकोनाजोल नामक दवा को 30 ग्राम को प्रति 15 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें
अधिक जानकारी हेतु अंकुर झा कृषि विज्ञान केंद्र औरैया से संपर्क करें।

( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट )

Back to top button
error: Content is protected !!