उत्तर प्रदेश औरैया पुलिस द्वारा 2022 महिला सम्बंधित अपराध मे न्यायालय में समन्वय कर प्रभावी पैरवी करते हुए अपराधियों को सख्त सजा से कराया गया दण्डित । ( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट)

( औरैया पुलिस द्वारा 2022 महिला सम्बंधित अपराध मे न्यायालय में समन्वय कर प्रभावी पैरवी करते हुए अपराधियों को सख्त सजा से कराया गया दण्डित  )

उत्तर प्रदेश औरैया एसपी चारु निगम ने बताया की जनपद में मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत वर्ष 2022 में महिला सम्बन्धित अपराधों के 48 मुकदमों में सम्बन्धित कुल 60 अभियुक्तों को माननीय न्यायालय द्वारा दण्डित किया गया जिसमें 10 अभियोगों में कुल 10 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा, 16 अभियोगों में 20 अभियुक्तों को 10 वर्ष या अधिक का कारावास, 22 अभियोगों में कुल 30 अभियुक्तों को 10 वर्ष से कम का कारावास का दण्डादेश किया गया जिससे समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति एक अच्छा संदेश गया एवं अपराधियों में भी यह संदेश गया कि अगर इस प्रकार का महिला एवं बच्चियों के साथ कोई अपराध कारित किया जाता है तो प्रशासन द्वारा उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। इस मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत जनपद औरैया पुलिस द्वारा वर्ष 2022 में कुल 216 लकड़कियों की सकुशल बरामदगी की गयी है। मिशन शक्ति अभियान से सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों एवं अभियोजन द्वारा अच्छा प्रदर्शन किया गया जिसके लिए यह सभी लोग बधाई के पात्र हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना जिसका प्रमुख उद्देश्य महिला सम्मान, महिला सशक्तिकरण, महिला सुरक्षा एवं महिला स्वाबलंबन को बढ़ावा देना है। प्रथम चरण अक्टूबर 2020 द्वितीय चरण मार्च 2021 एवं इसी क्रम में चतुर्थ चरण अप्रैल 2022 में शुरू किया गया जिसमें मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में समस्त पुलिस विभाग का मुख्य ध्येय महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कमी लाना तथा महिला सुरक्षा के मामलों में प्राथमिकता देने का है जिससे कि एक ऐसे समाज में संरचना हो जिसमें सभी महिलाएं एवं किशोरियों एवं बच्चे बिना किसी डर भय व दबाव के अपने घर से निकल सके तथा अपने सपनों को पूरा कर सके। माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशों के अनुपालन में जनपद औरैया के समस्त पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को यह स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया गया है कि महिला सुरक्षा में किसी तरह की कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी महिला/बालिका/ बच्चों के विरुद्ध कोई अपराध घटित होता है तो ऐसे मामलों की प्राथमिकता के आधार पर त्वरित विवेचना की जाए एवं कम से कम समय में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किए जाए एवं विचारण के दौरान भी या निर्देश दिए गए हैं कि महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में बिना किसी देरी के साक्षी न्यायालय में उपस्थित हो बिना किसी डर, भय व दबाव के अपने साथ अंकित कराये। यदि कोई साथी ऐसा कोई प्रार्थना पत्र देता है या ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षी या उसके घर वालों को अभियुक्त या उसके घर वालों से जान का खतरा है या उस पर किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा है तो तत्काल उस साक्षी को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित विधि व्यवस्था के अनुरूप विटनिस प्रोटेक्शन स्कीम के अंतर्गत उचित सुरक्षा प्रदान की जाये।मूल रूप से सामाजिक न्याय व्यवस्था वह शासन की मंशा के अनुरूप अपराधियों में यह संदेश जाना चाहिए कि यदि उन्होंने कोई अपराध किया है तो उन्हें सजा अवश्य रूप से मिलेगी तथा उन्हें बख्शा नहीं जाएगा एवं कठोर से कठोर दंड दिलवाया जाएगा। इसके अलावा पीड़ित पक्ष को यह संदेश भी जाता है कि यदि उनके साथ कोई अपराध हुआ है तो वह बिना किसी भय के अपने साथ घटित घटना को बताएं जिससे उनके साथ न्याय किया जा सके तथा उस अपराध के लिए अपराधी को युक्तियुक्त सजा दिलाई जा सके।

( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट )

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