उत्तर प्रदेश औरैया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला टास्क फोर्स की बैठक 10 फरवरी से चलेगा कृमि मुक्ति अभियान दिए गए आवश्यक दिशा निर्देश। ( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट )

( औरैया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला टास्क फोर्स की बैठक 10 फरवरी से चलेगा कृमि मुक्ति अभियान दिए गए आवश्यक दिशा निर्देश )

उत्तर प्रदेश औरैया बच्चों और किशोर-किशोरियों में कृमि के कारण मानसिक और शारीरिक विकास बाधित होता है। बच्चा कुपोषण और एनीमिया का शिकार हो जाता है। यह बातें जिलाधिकारी प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के सफलतापूर्वक संचालन के लिए कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में आयोजित जिला टास्क फोर्स की बैठक में कहीं । जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग सहित शिक्षा, आईसीडीएस विभाग आदि को निर्देशित किया कि 10 फरवरी से 15 फरवरी तक चलने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान के तहत 01 से 19 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं एवं किशोरों को कृमि संक्रमण से बचाव की दवा खिलाई जाये।
मुख्य विकास अधिकारी अनिल सिंह ने कहा की इस अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सहित आईसीडीएस, शिक्षा, पंचायती राज विभाग को आपस में समन्वय बनाकर काम करना होगा । उन्होने जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला वेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि शासकीय, निजी व सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापक/नोडल शिक्षक के साथ बैठक कर इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुये निर्धारित तिथियों पर सभी बच्चों की उपस्थिती सुनिश्चित की जाए । समस्त विभागों को निर्देशित किया कि माइक्रोप्लान का पुनः परीक्षण कर शत-प्रतिशत बच्चों को सूचीबद्ध कर लिया जाए । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि एक से 19 वर्ष तक आयु के लक्षित करीब 6 लाख 33 हज़ार 583 बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए “राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (नेशनल डिवार्मिंग डे) अभियान शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जायेगा। उन्होंने बताया कि जनपद में 10 फरवरी को चिन्हित स्कूल-कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्रों पर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। इसके बाद 13 से 15 जुलाई तक मॉप अप राउंड स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में आयोजित होंगे । अभियान के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखा जाएगा । बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेंद्र पाल सिंह, कार्यक्रम अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डिप्टी सीएमओ व नगरीय नोडल, समस्त ब्लॉक पीएचसी-सीएचसी के अधीक्षक व प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, डीपीएम, डीसीपीएम, नगरीय स्वास्थ्य समन्वयक समेत अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।nक्या हैं कृमि – जिन बच्चों के पेट में कीड़े (कृमि) होते हैं, वह कुपोषण के शिकार हो जाते हैं और शरीर में खून की कमी हो जाती है। संक्रमण रोकने के लिए बच्चों के नाखून साफ व कटे रहने चाहिए। इसके अलावा खुले में शौच के कारण भी कृमि का संक्रमण होता है। इससे बचने के लिए बच्चों के खानपान और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह दवा कृमि से मुक्ति की क्षमता रखती है।

निर्धारित डोज में दी जाएगी दवा

जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक अजय पांडेय ने बताया कि बच्चों को निर्धारित डोज के अनुसार दवा दी जाएगी। इसमें एक से दे वर्ष को बच्चों के अल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट को आधा कर उसका चूरा पानी के साथ खिलाना है। दो से तीन वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी का एक टैबलेट चूर्ण कर पानी के साथ खिलाना है। इसके साथ ही तीन से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों को एक पूरा टैबलेट चबाकर खिलाना है। इसके बाद ही पानी का सेवन करना है।

( पंकज सिंह राणावत की खास रिपोर्ट )

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