गोंडा आयुक्त कार्यालय पर 25 वर्षों से आशुलिपिक पद पर तैनात रक्षाराम दुसरी जगह स्थानांतरण होने पर भी जमाए बैठे पैर। ( निशिथ कुमार श्रीवास्तव की खास रिपोर्ट )

( गोंडा आयुक्त कार्यालय पर 25 वर्षों से आशुलिपिक पद पर तैनात रक्षाराम दुसरी जगह स्थानांतरण होने पर भी जमाए बैठे पैर )

गोण्डा जबकि स्पष्ट शासनादेश है कि समूह ग के कर्मचारियों का प्रत्येक तीन वर्ष में पटल अथवा क्षेत्र परिवर्तन कर दिया जाय। इसके बावजूद ऐसे कई मामले मिल जाते हैं कि अपने-अपने प्रभाव और सेटिंग गेटिंग के चलते कर्मचारी एक ही स्थान पर दशकों से अधिक जमें रहते हैं। ऐसा ही एक मामला गोण्डा के आयुक्त कार्यालय का प्रकाश में आया है। यहां तैनात आशुलिपिक रक्षाराम वर्मा पच्चीस वर्षों से इसी कार्यालय में तैनात हैं। प्राप्त समाचार के अनुसार दीवानी न्यायालय में वकालत कर रहे शुभम सिंह एडवोकेट ने मुख्यमंत्री पोर्टल एवं मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर शिकायत किया है कि पच्चीस वर्षों से रक्षाराम आशुलिपिक आयुक्त कार्यालय देवीपाटन मंडल गोण्डा में कार्य कर रहे हैं। पांच अक्टूबर 2021 को इनका स्थानान्तरण बहराइच जनपद में आशुलिपिक से वैयक्तिक सहायक पद पर पदोन्नति करते हुए कर दिया गया फिर भी न जाने किस लगाववश अभी भी आयुक्त कार्यालय गोण्डा में सम्बद्ध होकर कार्य कर रहे हैं। शिकायती पत्र में लगाये गये आरोप में कहा गया है कि रक्षाराम वर्मा 1995 में कलेक्ट्रेट गोण्डा में गलत तरीके से अनुचित लाभ के तहत आशुलिपिक के पद पर नियुक्त हुए। इससे पहले ये होमगार्ड थे। 1997 में जब आयुक्त कार्यालय का गठन हुआ तो बिना किसी आदेश के कलेक्ट्रेट से आयुक्त कार्यालय में काम करने लगे। 28 सितंबर 2000 को तत्कालीन आयुक्त चन्द्र प्रकाश के आदेश से अनुसूचित जाति के आरक्षित पद पर आशुलिपिक के पद पर नियुक्त होकर कार्य करने लगे। वर्ष 2010 में तत्कालीन आयुक्त डा. कुलदीप सिंह को गुमराह करते हुए अभिलेखों में हेरा-फेरी करके सीधे कमिश्नर के पीए पद पर पदोन्नति करा लिया। इस हेरा- फेरी की जानकारी होने पर वर्ष 2011-12 में तत्कालीन आयुक्त डा. अशोक कुमार वर्मा द्वारा इनके पदोन्नति आदेश को निरस्त कर दिया गया। जिसके खिलाफ ये हाईकोर्ट भी गये परन्तु हाईकोर्ट ने भी इनकी याचिका खारिज कर दिया। इतना ही नहीं बल्कि तत्कालीन आयुक्त अशोक कुमार वर्मा द्वारा इनका सेवा स्थानान्तरण आदेश दिनांक 28-09-2000 को भी खारिज कर दिया गया। इस आदेश के अभिलेखों को कर्मचारियों के सहयोग से कैम्प कार्यालय पर दबा दिया गया और आयुक्त अशोक कुमार वर्मा के स्थानान्तरण उपरान्त छुट्टी से वापस आकर आयुक्त कार्यालय में कार्य करने लगे। हालांकि वर्तमान समय में रक्षाराम वर्मा कागजों में कलेक्ट्रेट बहराइच में वैयक्तिक सहायक के पद पर कार्यरत हैं परन्तु पूर्व कमिश्नर एसवीएस रंगाराव के आदेश पर आयुक्त कार्यालय गोण्डा में सम्बद्ध होकर फिर से वहीं पर कार्य कर रहे हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि रक्षाराम वर्मा ने आयुक्त कार्यालय नहीं छोड़ा और दशकों बाद स्थानान्तरण में मिले प्रमोशन को ठुकराते हुए पुनः आयुक्त कार्यालय गोण्डा में सम्बद्ध होकर डट गए। प्रकरण पर आयुक्त देवीपाटन मंडल एमपी अग्रवाल से बात करने के लिए उन्हें अनेकों फोन समय बदलकर किया परन्तु फोन नहीं उठा। एक बार फोन उठा भी तो उनके किसी कर्मचारी ने उठाया और कहा कि साहब अन्दर है। बाद में बात करवाते हैं। बाद में भी फोन नहीं उठा।

( निशिथ कुमार श्रीवास्तव की खास रिपोर्ट )

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