उत्तर प्रदेश लखनऊ इस धरती पर जल बिना इंसान का कोई अस्तित्व ही नहीं जल हमारे लिए ईश्वर का दिया हुआ वरदान हैजल ही जीवन है,आओ हम सब मिलकर जल को बचाएं | (धनंजय सिंह स्वराज सवेरा एडिटर इन चीफ यूपी )


( लखनऊ इस धरती पर जल बिना इंसान का कोई अस्तित्व ही नहीं जल हमारे लिए ईश्वर का दिया हुआ वरदान हैजल ही जीवन है,आओ हम सब मिलकर जल को बचाएं )
लखनऊ जल ही जीवन है यह कथन बिल्कुल सत्य है,क्योंकि पानी के बिना इस धरती पर जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है।जल एक ऐसी कीमती चीज है,जिसके बिना इंसान का कोई अस्तित्व ही नहीं।जल हमारे लिए ईश्वर का दिया हुआ वरदान है। यह ना केवल पीने के काम आता है बल्कि इससे हम नहाते हैं, कपड़े धोते हैं, खाना पकाते हैं और साफ-सफाई भी करते हैं।जल ना केवल मनुष्य के लिए जरूरी है बल्कि जीव जंतुओं और पक्षियों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जल का हमारे जीवन में बहुत ज्यादा महत्व है, इसलिए इसे बर्बाद होने से बचाना भी हमारा कर्तव्य है। जिस तरह से आज के समय में जल प्रदूषण बढ़ रहा है। वह बहुत ही दुखद है, यदि आज हमने धरती के जल की बचत नहीं की और इसकी बिना वजह बर्बादी को नहीं रोका तो आने वाले समय में धरती पर जल का नामोनिशान नहीं बचेगा और हमारी आने वाली पीढ़ी बिना जल के धरती पर जीवित नहीं रह सकेगी।जल को हमारे जीवन का मूल्यवान धरोहर कहें या ये कहें कि इसके बिना जीवन के बारे में सोच भी नहीं सकते तो यह गलत भी नहीं होगा,क्योंकि जल है तो जीवन है। जल हमारी पृथ्वी में लगभग 71% है।
इसमें से हमारे पीने योग्य केवल 3 प्रतिशत ही जल है। जिसे अलवणीय जल कहा जाता है और इसका बहुत छोटा भाग ही प्रयोग के लिए उपलब्ध है। अलवणीय जल की उपलब्धता समय और स्थान के अनुसार भिन्न-भिन्न होती हैं। इस प्रकार जल के विकास के लिए जल का मूल्यांकन और संरक्षण आवश्यक हो गया है। जल मनुष्य के लिए बेहद अहम होता है। जल के बगैर हम 1 दिन भी नहीं रह सकते हैं। जल सिर्फ सेवन के लिए नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के गतिविधियों में इस्तेमाल होता है ।
जल से हम खाना बनाते हैं, कपड़े धोते हैं, नहाते हैं और हाथ, पैर भी हम जल द्वारा धोते हैं। जल नियमित रूप से हमें जरूरत होता है।जल हमें नदियों, तालाबों वर्षा जैसे स्रोत से प्राप्त होता है। पृथ्वी पर अधिकांश जल समुंद्र में पाया जाता है,जो खारा है और कुछ बर्फीला होता है।हम ना इसे इस्तेमाल कर सकते हैं और ना ही सेवन कर सकते हैं,क्योंकि समुद्र के पानी में नमक की मात्रा अत्यधिक होती है तथा समुद्र के ही पानी से नमक बनाया जाता है जिसे हम खाने के रूप में उपयोग करते हैं।
जल जैसे मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है, वैसे ही यह जीव जंतुओं, पेड़ पौधे और पृथ्वी के अन्य प्राणियों के लिए भी जरूरी है। हमारे शरीर का आधा वजन ही जल से बना हुआ है, बिना जल के पृथ्वी पर जीवन ही असंभव है,क्योंकि जल के बिना मनुष्य तड़पने लगता है और दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है।जल के बिना पंछियों और अन्य प्राणियों का भी यही हाल होता है। कुछ फसलें ऐसी होती हैं।जो जल के बिना पैदा ही नहीं होती हैं जैसे – गेहूं, चावल, मक्का आदि।जल के बिना पेड़ पौधे मुरझा जाते हैं और ऑक्सीजन की कमी से मृत्यु हो जाती है, इसलिए जल की एक-एक बूंद को व्यर्थ होने से बचाना चाहिए क्योंकि जल है तो कल है।
जल एक ऐसा पदार्थ है जो दो हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के अणुओं से मिलकर बनता है।इसलिए जल का रासायनिक सूत्र H₂O है, यदि आसान शब्दों में कहें तो हाइड्रोजन की एक ऑक्साइड के रूप में जब हाइड्रोजन या हाइड्रोजन योगिक जलते हैं या ऑक्सीजन का ऑक्सीजन यौगिकों के साथ में प्रतिक्रिया करते हैं।तब जाकर जल का निर्माण होता है। जल एक ऐसा पदार्थ है जिसके तीन अवस्थाएं होती हैं -ठोस . द्रव,गैस.
भारत में विश्व के धरातल क्षेत्र का लगभग 2.45 प्रतिशत जल संसाधनों का 4 प्रतिशत और जनसंख्या का लगभग 16 प्रतिशत भाग पाया जाता है। देश में 1 वर्ष में वर्णन से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग 4,000 घन किलोमीटर है।धरातलीय जल और पुनः पूर्ति योग जल से 1,869 घन किलोमीटर जल उपलब्ध है। इसमें से केवल कुछ प्रतिशत जल का लाभदायक उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार हमारे देश में जल संसाधन 1,122 घन किलोमीटर है।
पृथ्वी पर जल के चार मुख्य स्रोत है। नदिया, झीले, तलैया, तालाब। देश में कुल नदियां तथा सहायक नदियां जिन की लंबाई 1.6 कि.मी. से अधिक है। ऐसे नदियों को मिलाकर 10,360 नदियां हैं। भारत में सभी नदी बेसिनो में औसत वार्षिक प्रवाह 1,869 घन किलोमीटर में होने का अनुमान किया गया है।फिर भी स्थलाकृतिक, जलीय और अन्य दबावों के कारण प्राप्त दरात जल का केवल लगभग 690 घन कि.मी. (32%) जल का ही उपयोग किया जा सकता है। कुछ नदियां जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु के जल ग्रहण क्षेत्र बहुत बड़े हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है।
ये नदियां यद्यपि देश के कुल क्षेत्र के लगभग एक तिहाई भाग पर पाई जाती हैं। जिनमें कुल धरातलीय जल संसाधनों का 60 प्रतिशत जल पाया जाता है। दक्षिण भारतीय नदियां जैसे – गोदावरी, कृष्णा और कावेरी में वार्षिक जल प्रभाव का अधिकतर भाग काम में लाया जाता है। लेकिन ऐसा ब्रह्मपुत्र, और गंगा, बेसिनो में अभी भी संभव नहीं हो सका है।पारंपरिक रूप से भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसकी जनसंख्या का लगभग दो – तिहाई भाग कृषि पर निर्भर है। इसलिए पंचवर्षीय योजना में कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए सिंचाई के विकास को एक अति उच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है।
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( धनंजय सिंह स्वराज सवेरा एडिटर इन चीफ यूपी )
