आध्यात्मिक नगरी काशी की तरह झांसी में शुरू की‌ गई पहुंज नदी परंपरा की शुरुआत की‌ गईआरती जानिए क्या है लक्ष्य । ( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )

( आध्यात्मिक नगरी काशी की तरह झांसी में शुरू की‌ गई पहुंज नदी परंपरा की शुरुआत की‌ गईआरती जानिए क्या है लक्ष्य )

झांसी आध्यात्मिक नगरी काशी की तरह अब वीरों की धरती बुंदेलखंड के झांसी में भी नदी की आरती की परंपरा की शुरुआत हो गई है।झांसी शहर से गुजरने वाली पहुंज नदी की आरती कर परंपरा शुरु की‌ गई है।जल और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए यह परंपरा शुरु की गई है।अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आस्था को भी इससे जोड़ दिया गया है।

आरती कार्यक्रम में मौजूद रोहित पाण्डेय ने बताया कि भारतीय संस्कृति में देने वाले को देवता कहा जाता है और उसकी पूजा-अर्चना की जाती है।जल हमें जीवन देता है। इसलिए जल की प्रमुख स्रोत नदियों को पवित्र मान कर उनकी पूजा-अर्चना की परंपरा सदियों से चली आ रही है।यह पहुंज नदी की उत्पत्ति झांसी के समीप मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ ज़िले की पहाड़ियों में होती है।इस नदी का प्राचीन नाम पुष्पावती है। यह यमुना नदी की एक सहायक नदी है।

कार्यक्रम के आयोजक पीयूष रावत ने बताया कि नदी बचाओ अभियान के तहत यह आरती कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके माध्यम से लोगों को नदी को स्वच्छ रखने और इसमें कूड़ा न डालने का संदेश दिया जाएगा।नदी को साफ करने और इसकी प्रवाह को दोबारा जीवित करने के लिए जिला प्रशासन का भी सहयोग लिया जा रहा है।कार्यक्रम का संचालन करते हुए नीती शास्त्री ने बताया कि बचपन में उन्होंने पहुंज नदी को धारा प्रवाह बहते हुए देखा है।उनका सपना है कि दोबारा नदी को उसी तरह बहते हुए देखें।

( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )

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