लखीमपुर खीरी उत्तरकाशी से 16 दिन बाद टनल में फंसे 41 मजदूरों को सकुशल बाहर निकालने पर लौट आई मां की खुशियां आंखों से छलके आंशू। ( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )


( उत्तराखंड में 12 नवंबर से सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे सभी 41 मजदूरों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया )
लखीमपुर खीरी उत्तराखंड के उत्तरकाशी से 16 दिन बाद राहत देने वाली खबर है।निर्माणाधीन सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रैट माइनर्स की टीम ने मैन्युअल ड्रिलिंग पूरी कर ली है।इसके बाद मजदूरों तक पाइप पहुंचाया गयाक्षफिर मेडिकल टीम टनल के अंदर पहुंची। यह खबर मिलते ही उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के भैरमपुर गांव की मंजीत की मां की आंखें चमक उठी हैं। मां अपने बेटे का बेसब्री से इंतजार कर रही है। मंजीत के पिता चौधरी उत्तरकाशी में ही मौजूद हैं। उनके पास मोबाइल फोन नहीं है। किसी दूसरे के फोन से परिजनों को सूचना दी है। बेलराया इलाके से पांच किलोमीटर दूर जंगल के किनारे बसे गांव भैरमपुर में मंजीत का परिवार रहता है। यहां मंजीत के माता-पिता, दो बहनें और बूढ़े दादा रहते हैं। इन्हीं के भरण पोषण के लिए मंजीत उत्तरकाशी मजदूरी करने गया था। मां चौधराइन ने बेटे से कहा था कि दिवाली पर चले आना, लेकिन वह मजबूरी वश नहीं आ सका और फिर टनल हादसा हो गया। घटना के दूसरे दिन मंजीत के पिता चौधरी उत्तरकाशी रवाना हो गए थे। इधर बेटे के इंतजार में मां की बेचैनी बढ़ती जा रही थी।मंगलवार की सुबह खबर मिली थी कि टनल में फंसे मजदूरों को जल्द ही बाहर निकाला जा सकता है।यह खबर सुनते ही बेटे के इंतजार में गुमसुम बैठी मां का चेहरा चमक उठा।मंजीत की मां ने बताया कि बचाव कार्य में लगी मशीनें जब रुक जाती थीं, तो ऐसा लगता था कि जिंदगी रुक गई। अब उनकी जान में जान आई है। वह हर पल भगवान से यही प्रार्थना कर रही थीं कि उनके बेटे समेत सभी सुरक्षित बाहर निकल आएं। मंजीत की बहनों ने बताया कि वह भाई को बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। उसके घर लौटने पर वह भैया दूज का प्रसाद खिलाएंगी।

( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )
