वाराणसी अध्यात्मिक धर्म नगरी में हर वर्ष हजारो मील दूर से आने वाले विदेशी साइबेरियन पक्षी बने आकर्षण का केंद्र। ( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )

( अध्यात्मिक धर्म नगरी में हर वर्ष हजारो मील दूर से आने वाले विदेशी साइबेरियन पक्षी बने आकर्षण का केंद्र )

वाराणसी आध्यात्मिक नगरी काशी की खूबसूरती निहारने के लिए पूरे विश्व से शैलानी आते है।काशी के खूबसूरत घाटों के अलावा मंदिर और गलियों का दीदार करते हैं।गुलाबी ठंड के बीच गंगा के किनारे बसी काशी में विदेशी परिंदें आ जाते हैं।हर साल ठंड में हजारों किलोमीटर का सफर तय कर साइबेरियन बर्ड्स काशी आते हैं।इनके काशी आने से घाटों की खूबसूरती में चार चांद लग जाता है। बता दें कि रूस से लगे महासागर के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र से ठंड में यह साइबेरियन पक्षी अपना छोड़कर हजारों किलोमीटर का सफर तय करके आध्यात्मिक नगरी काशी आते हैं।ये पक्षी काशी आते हैं तो यहां गंगा की लहरों में अटखेलियां करते हैं और गंगा उस पार रेत पर प्रजनन के बाद अंडे देते हैं।चार महीने बाद जब यह पक्षी वापस अपने वतन लौटते हैं तो उनके साथ उनके बच्चे भी होते हैं।भोजन की तलाश और वातानुकूलित जगह की तलाश में यह विदेशी परिंदे यहां आते हैं।इन पक्षियों के काशी आने का रास्ता भी बिल्कुल सेम होता है।ये जिस रास्ते से काशी आते हैं हर बार उसी रास्ते को यहां आने के लिए चुनते हैं।कई बार ऐसा भी होता है कि इस लम्बे सफर के दौरान कई पक्षी दम भी तोड़ देते हैं।गंगा की लहरों पर अटखेलियां करने वाले ये खूबसूरत विदेशी परिंदे यहां आने वाले हजारों शैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं। यहां आने वाले शैलानी इन्हें दाना भी देते हैं और इनके साथ फोटो खिंचाकर उसे यादगार भी बनाते हैं।

( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )

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