सोनिया गांधी ने लगातार चार बार रायबरेली से जीतकर क्यों छोड़ दी रायबरेली सीट,अपनी पारंपरिक सीट किसे सौंपेगी सोनिया,2022 में ऐसा क्या हुआ था खेल । ( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )

(सोनिया गांधी ने लगातार चार बार रायबरेली से जीतकर क्यों छोड़ दी रायबरेली सीट,अपनी पारंपरिक सीट किसे सौंपेगी सोनिया,2022 में ऐसा क्या हुआ था खेल )

रायबरेली कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन किया है। सोनिया के नामांकन से साफ हो गया है कि अब वह रायबरेली से आगामी लोकसभा के चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगी। सोनिया गांधी लगातार चार बार रायबरेली से जीतकर लोकसभा पहुंचीं।अब सियासी गलियारों में कयास लग रहे हैं कि सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस के गढ़ रायबरेली का क्या होगा। गांधी परिवार अपनी पारंपरिक सीट किसे सौंपेगा,आखिर सोनिया ने यह सीट क्यों छोड़ दी।बता दें कि 1951 के बाद से सिर्फ तीन लोकसभा चुनाव को छोड़कर हर बार कांग्रेस यहां से जीत दर्ज की है।

रायबरेली कैसे बनी कांग्रेस का गढ़

रायबरेली लोकसभा सीट के इतिहास को उठाकर देखा जाए तो1951 पहले लोकसभा चुनाव से हर बार नेहरू-गांधी परिवार का कोई न कोई सदस्य रायबरेली से चुनाव लड़ा। सिर्फ दो बार ऐसे मौके आए, जब नेहरू-गांधी परिवार के किसी सदस्य ने रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ा। वो था- 1962 और 1999 का चुनाव।रायबरेली सिर्फ सोनिया गांधी ही नहीं उनकी सास इंदिरा गांधी का भी गढ़ रहा।इंदिरा गांधी तीन बार रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ीं और जीतकर लोकसभा में पहुंची थीं। इंदिरा के पति फिरोज गांधी भी रायबरेली से चुनाव लड़े।फिरोज गांधी ने 1952 और 1957 में दो बार जीत दर्ज की।इसी तरह पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के पोते अरुण नेहरू ने 1980 के उपचुनाव और 1984 में रायबरेली से जीत हासिल की थी। 1989 और 1991 में जवाहरलाल नेहरू की भाभी शीला कौल ने रायबरेली लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। रायबरेली लोकसभा सीट के साल 1951 के पहले लोकसभा चुनाव से अब तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 17 में से केवल 6 चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर एक तिहाई से भी कम रहा है। कांग्रेस ने आठ बार 50% से अधिक वोट हासिल किए, जिसमें सोनिया द्वारा लड़े गए सभी चार लोकसभा चुनाव शामिल हैं।कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2009 में रायबरेली लोकसभा सीट से किसी भी उम्मीदवार द्वारा जीते गए सबसे अधिक वोट शेयर 72.2% हासिल कर रिकॉर्ड बनाया था।उस चुनाव में यूपीए दोबारा केंद्र में सत्ता में लौटी थी।

1996 और 1998 में सबसे बुरा प्रदर्शन

रायबरेली लोकसभा सीट पर कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में था। तब कांग्रेस को 10% से भी कम वोट मिले थे, लेकिन 1999 के चुनाव से कांग्रेस का वोट शेयर फिर बढ़ने लगा।इस चुनाव में राजीव और सोनिया के करीबी गांधी परिवार के वफादार सतीश शर्मा रायबरेली लोकसभा से चुनाव लड़े थे और जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे।

भाजपा ने कैसे किया गेम

2014 से पहले तक रायबरेली में कांग्रेस के मुख्य प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी हुआ करते थे, लेकिन 2014 के बाद कहानी बदल गई।सपा-बसपा को पीछे धकेलते हुए भाजपा मुख्य प्रतिद्वंदी बन गई। 2014 के चुनाव में भाजपा उप-विजेता थी। 2014 में जहां बीजेपी ने 21.1% वोट हासिल किया तो 2019 में 38.7 फीसदी वोट अपने नाम किया।रायबरेली लोकसभा सीट पर कांग्रेस भले ही अच्छा प्रदर्शन करती रही हो, लेकिन हाल के दिनों में विधानसभा क्षेत्रों में कहानी अलग रही है।

2022 का विधानसभा चुनाव

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस न केवल रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र के सभी 5 विधानसभा क्षेत्रों में हार गई।बल्कि इन 5 में से 4 में तीसरे और 1 में चौथे स्थान पर रही। इनमें से 4 सीटों पर सपा ने जीत हासिल की और 1 पर भाजपा ने। 5 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को केवल 13.2% वोट शेयर हासिल हुआ, जो कि सपा के 37.6% और भाजपा के 29.8% से बहुत कम था।बता दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पूरे सूबे में पार्टी को सिर्फ 2 सीट और 2.3% वोट नसीब हुआ था।

2022 विधानसभा चुनाव का परिणाम

अब 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस और भाजपा ने रायबरेली लोकसभा सीट की 2-2 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी।जबकि सपा ने 1 सीट जीती थी। तब कांग्रेस ने सभी क्षेत्रों में 31.2% के साथ सबसे अधिक वोट शेयर हासिल किया था, उसके बाद भाजपा 27.8% वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर थी,लेकिन 2017 में यूपी में कांग्रेस की कुल सीटों की संख्या बहुत निराशाजनक थी। कुल 7 सीटें हासिल की थीं और 6.2% वोट शेयर अपने नाम किया था।

2012 का विधानसभा चुनाव

2012 में जब केंद्र में कांग्रेस की सत्ता थी और रायबरेली लोकसभा सीट उसके कब्जे में थी, तब भी कांग्रेस विधानसभा में कुछ खास नहीं कर पाई थी। 2012 में रायबरेली की 5 में से 4 सीटें नवोदित पीस पार्टी ऑफ इंडिया ने जीती थीं। हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली के विधानसभा क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन के बावजूद कांग्रेस ने यूपी में कुल मिलाकर बेहतर प्रदर्शन किया था। 28 सीटें और 11.7% वोट अपने नाम किया था।

( धन्नजय सिंह की खास रिपोर्ट )

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