गोण्डा नवनियुक्त लेखपालों में गोण्डा जनपद से भी सौ से अधिक लेखपाल लेखपालों ने राजस्व परिषद पर नियुक्ति पत्र प्रदान कर नियमानुसार करने की मांग को लेकर किया धरना-प्रदर्शन । (निशिथ कुमार श्रीवास्तव की खास रिपोर्ट)


( नवनियुक्त लेखपालों में गोण्डा जनपद से भी सौ से अधिक लेखपाल लेखपालों ने राजस्व परिषद पर नियुक्ति पत्र प्रदान कर नियमानुसार करने की मांग को लेकर किया धरना-प्रदर्शन )
गोण्डा प्रदेश के नवनियुक्त लेखपालों में गोण्डा जनपद से भी सौ से अधिक लेखपाल आज सोमवार को राजस्व परिषद लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर पहुंचे। प्रदेश के भिन्न-भिन्न हिस्से से हजारों की संख्या में राज्स्व परिषद पहुंचे लेखपालों ने अपनी समस्या को रखते हुए धरना-प्रदर्शन किया। दिन भर के धरना-प्रदर्शन के बाद लेखपालों की 11 सदस्यीय टीम राजस्व परिषद के सचिव से मिलने के लिए बुलाई गई। नवनियुक्त लेखपालों की मुख्य रूप से एक ही मांग है कि उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए उन्हें नियमानुसार काम करने दिया जाए और काम के अनुसार उन्हें वेतन दिया जाए। यदि उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय का कोई निर्णय उनके विरोध में आता है तो लेखपाल उसका विरोध शासन प्रशासन से न करके न्यायालय द्वारा ही प्रकरण का निस्तारण करेंगे। उनकी मेहनत और उसके परिणाम को राजनैतिक रूप न दिया जाए। खबर लिखे जाने तक ज्ञात हुआ है कि नवनियुक्त लेखपालों की सभी मांगों को सचिव राजस्व परिषद ने स्वीकार कर लिया है और उन्हें पहले की ही तरह काम करने को कहा गया है। सचिव राजस्व परिषद ने ये भी कहा कि हम लिखित में नहीं दे सकते परन्तु योगदान आख्या जमा करने की तिथि से ही सभी को वेतन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 1 मार्च को उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है। उसके बाद निश्चित ही समस्या का समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने बताया कि आचार संहिता का इस नियुक्ति पत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इन मौखिक आश्वासनों के बाद भी नवनियुक्त लेखपाल पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हुए और लिखित आश्वासन की मांग खबर लिखे जाने तक करते रहे।इस दौरान उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम मूरत यादव भी उपस्थित रहे।विदित हो कि लेखपालो को नियुक्ति पत्र एक बार मिल चुका था। लेखपालों को भ्रम में रखने से उनमें से अनेक किसी न किसी बीमारी और डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। क्योंकि उनका भविष्य अंधकारमय दिखाई देने लगा है। बताते चलें कि उच्च न्यायालय के सिंगल बेंच का निर्णय आयोग के पक्ष में हुआ। इसी आधार पर आयोग ने परिणाम घोषित किया। परिणाम घोषित होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को उनके चयनित जनपद से बुलाया गया। इसके बाद चिकित्सीय परीक्षण करवाकर अपने सम्पूर्ण पत्रावलियों के साथ तहसील में प्रस्तुत हुए और नियुक्ति पत्र प्राप्त किए। बाद में नियुक्ति का राजनैतिक लाभ लेने के उद्देश्य से अभ्यर्थियों से नियुक्ति पत्र वापस ले लिया गया और बताया गया कि 23 फरवरी को बनारस में मेगा शो के दौरान सभी अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री एवं अन्य मंत्रियों द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके बाद नवनियुक्त लेखपालों को हल्का प्रदान करते हुए उन्हें तहसील स्तर पर लिखित रूप से आदेश देते हुए काम भी लिया जाने लगा। जिसके अंतर्गत एग्रीस्टेक, घरौनी एवं निर्वाचन संबंधी कार्य लिए गए। इधर अंतिम चयन परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थी सर्वोच्च न्यायालय चले गए। सर्वोच्च न्यायालय में राज्स्व परिषद द्वारा ये बताने पर कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र अभी नहीं दिया गया है, सर्वोच्च न्यायालय ने 23 फरवरी को मेगा शो में वितरित किए जाने वाले नियुक्ति पत्र पर रोक लगा दिया। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय की डबल बेंच को चार सप्ताह में मामले के निस्तारण का निर्देश दिया है। जबकि लेखपाल नियमावली राजस्व संहिता 2006 के अनुसार योगदान आख्या ही ज्वाइनिंग डेट मानी जाती है, और सभी नवनियुक्त लेखपाल योगदान आख्या तहसील में जमा कर चुके हैं।

(निशिथ कुमार श्रीवास्तव की खास रिपोर्ट)
