कौशाम्बी की अजब कहानी बना चर्चा का विषय दबंगों की दबंगई आई सामने मंझनपुर तहसील गरीब परिवार जमीनी विवाद में खा रहा दर-दर की ठोकरें नहीं मिला न्याय । ( राम प्रसाद गुप्ता की खास रिपोर्ट कौशाम्बी )


( कौशाम्बी की अजब कहानी बना चर्चा का विषय दबंगों की दबंगई आई सामने मंझनपुर तहसील गरीब परिवार जमीनी विवाद में खा रहा दर-दर की ठोकरें नहीं मिला न्याय )
उत्तर प्रदेश जनपद कौशाम्बी: जिले मंझनपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम,बंधवा रजवर के मंजरा बभनपुरवा के दलित दु:खू पुत्र रामस्वरूप को वर्ष 2004 में! मंझनपुर तहसील से सरकारी आराजी संख्या 66 बंजर भूमि पर पट्टा मिला था।दु:खू का परिवार इस बात से प्रसन्न था कि उसके दु:ख का पहाड़ कम हो जाएगा! और वह सुख में जीवन व्यतीत करेगा! लेकिन उसकी तरक्की लोगो को रास नही आई और उसे कानून के मकड़जाल में उलझा दिया। सरकार से पट्टा मिलने के बाद भी दु:खू का दु:ख कम नहीं हुआ और उसकी मुसीबत लगातार बनी रही। 20 वर्षों के बीच अधिकारी नेता और अदालत का दरवाजा ही वह खटखटाता रह! गया। कानूनी लड़ाई में। फंसने के बाद दलित ने अपनी मजदूरी की रकम भी गवा दी। तरक्की छोड़िए रोटी के लाले पड़ गए। लेकिन उसे पट्टे की सरकारी जमीन पर 20 वर्ष की भाग दौड़ के बाद भी कब्जा नहीं मिल सका। पहले पुरुषोत्तम लाल लोध ने सरकार के बंजर भूमि को अपना बताकर मुकदमा दाखिल कर दिया जमीन सरकार की थी पट्टा दु:खू को मिला था लेकिन बीच में! पुरुषोत्तम टांग लगाकर खड़ा हो गया और इस बात को लेकर कई साल तक मुकदमा चला अंत में। फैसला हुआ कि जमीन दु:खू की हैं। इस जमीन से पुरुषोत्तम से कोई मतलब नहीं हैं। और जब दु:खू के पक्ष में! अदालत का फैसला आ गया तो गांव का किशन यादव छत्रधारी प्रमोद कुमार फूलचंद पुत्रगण स्वर्गीय छेदीलाल राजू पुत्र रोशन लाल, सीता देवी पत्नी प्रमोद कुमार रीना देवी पत्नी फूलचंद निराशा देवी पत्नी बाबूलाल सुनीता देवी पत्नी राम प्रकाश अभय सिंह नन्हू सिंह पुत्रगण किशन लाल ने सरकार के बंजर आराजी 66 को अपनी बता कर दु:खू को कब्जा करने से रोक दिया। सरकार के बंजर आराजी 66 को किशन अपनी बताने लगा और सरकार की आराजी नंबर 66 बंजर जिस पर दु:खू को पट्टा मिला है उस पर दु:खू को अब किशन कब्जा नहीं करने दें। रहा हैं। 20 वर्षो से न्याय के लिए दलित व्यक्ति थाना दिवस तहसील समाधान दिवस से लेकर एसपी डीएम कमिश्नर मुख्यमंत्री तक सैकड़ो बार फरियाद कर चुका हैं। लेकिन सरकार से पट्टे पर मिले भूमि पर दुखू को अभी तक कब्जा नहीं मिल सका हैं। जिससे जिले की बेहतर कानून व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता हैं। एक तरफ सरकार से लेकर सत्ता पक्ष के नेता और अधिकारी कहते हैं। कि जिले की कानून व्यवस्था बेहतर हैं। लेकिन जो जमीन सरकार की हैं। उस जमीन पर सरकार ने दलित को पट्टा दिया हैं। अदालत से वह मुकदमा जीत चुका हैं। और उसके बाद उस जमीन पर दलित 20 वर्षों से कब्जा नहीं पा रहा हैं! तो कहां बेहतर कानून व्यवस्था की बात की जा सकती हैं। अपर जिला अधिकारी प्रबुद्ध सिंह की अदालत से 7 अगस्त 2024 दु:खू मुकदमा भी जीत चुका हैं। लेकिन अपर जिला अधिकारी के न्यायालय के आदेश को ना तो मंझनपुर कोतवाल मानने को तैयार हैं। और ना ही लेखपाल अफसर के आदेश मानने को तैयार हैं। जिससे लेखपाल और कोतवाल के कारनामे का अंदाजा लगाया जा सकता हैं। जिले में गरीब दलित कमजोर को कानून का हवाला देकर प्रताड़ित कर मनमानी तरीके से थानेदारी और लेखपाली करने वालों पर अभी तक कार्यवाही भी नहीं हुई! हैं। दु:खू जैसे जिले में हजारों लोग न्याय के लिए कानून की चौखट पर दम तोड़ रहें। हैं। और अफसर कानून के मकड़जाल में। गरीबो को उलझा कर बेहतर कानून व्यवस्था की बात कर रहें। हैं।

( राम प्रसाद गुप्ता की खास रिपोर्ट कौशाम्बी )
